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कुँवर नारायण के उद्धरण

सुजान सौन्टैग का कहना कि हर युग को अपने लिए तरह आत्मिकता के सार को खोजना पड़ता है—आज की कला के लिए उतना ही सच है, जितना किसी भी युग की कला के लिए रहा है।