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उमर ख़य्याम के उद्धरण

संसार में प्रत्येक वह मनुष्य सुखी है जिस पर खाने के लिए आधी रोटी है, और बैठने के लिए जगह, न वह किसी का सेवक है, न स्वामी है। उससे कह दो प्रसन्न रहो। क्योंकि वह प्रसन्नता का संसार रखता है।