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उमर ख़य्याम के उद्धरण

हे प्रिय! तू जैसा चाहे वैसा कर। चाहे तो मुझे विरह में रुला चाहे मिलन से प्रसन्न कर दे। मैं तुझसे यह नहीं कहूँगा, कि तू मुझे इस प्रकार रख। वह मनुष्य ही क्या है जो हृदय से इस प्रकार इच्छा करे कि मुझे इस प्रकार रख।