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उमर ख़य्याम के उद्धरण

लौकिक प्रेम में उज्ज्वलता नहीं होती जिस प्रकार अधजली अग्नि में शोभा नहीं होती। प्रेमी तो ऐसा होना चाहिए कि प्रत्येक वर्ष, प्रत्येक मास व रात-दिन न विश्राम करे, न चैन करे, न उसे नींद आवे।