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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

संसार की समस्त संस्थाएँ; चाहे वे आरंभ में कैसी भी लाभदायक रही हों, समय पाकर मनुष्य जाति की उन्नति में बाधा डालने लगती हैं और उस समय उनका विध्वंस कर देना ही बुद्धिमत्ता है।