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महात्मा गांधी के उद्धरण

संगीत, कथा-वार्त्ता, चित्रकला, नृत्य, नाटक, सिनेमा आदि ललित-कलाएँ यदि उचित सीमा में रहें तो वे जन-समाज के निर्दोष मनोरंजन, ज्ञान-प्राप्ति तथा भावना–विकास के साधन हो सकती है।