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वात्स्यायन के उद्धरण

संध्या के समय, रात में और अंधकार में—स्त्रियाँ निर्भय होकर सुरत-व्यापार में रागयुक्त होती हैं। उस समय वे सुरत-क्रिया के लिए पुरुष को मना नहीं करती। इसलिए उस समय नायिका को संभोग के लिए तैयार करना चाहिए।