संध्या के समय प्रदोषकाल में संगीत का आयोजन उपयुक्त होता है। अतः नागरक को संगीत-गोष्ठी में सम्मिलित होकर संगीत का आनंद लेना चाहिए। तत्पश्चात् सुसज्जित तथा सुगंधित धूपादि से सुवासित, वासगृह में अपने सहायकों के साथ शय्या पर बैठकर अभिसारिका (प्रेमिका) की प्रतीक्षा करनी चाहिए।