Font by Mehr Nastaliq Web

अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण

सामान्य मनुष्य के साथ कलाकार का सिर्फ़ मन की अनुभूति को व्यक्त करने की क्षमता और अक्षमता को लेकर अंतर होता है, दुःख पाने पर सामन्य मनुष्य बेजार होकर रोना—धोना शुरू कर देता है, कलाकार रोता नहीं है, किंतु उसके मन का रुदन कला के माध्यम से एक अपरूप सुंदर छंद में व्यक्त होता है।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी