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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

सब से नीच मनुष्य वह है, जिसका हाथ सदा अपनी ओर रहता है और जो अपने ही लिए सब पदार्थो को लेने में लगा रहता है। और सब से उत्तम पुरुष वह है, जिसका हाथ बाहर की ओर है तथा दूसरों को देने में लगा है।

अनुवाद : पण्डित द्वारकानाथ तिवारी