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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

राजनीतिक दाँव-पेंच में पड़कर; हमें कम-से-कम इतना तो न भूलना चाहिए कि वर्तमान काल ही सब कुछ नहीं है—भूत और भविष्य काल भी कोई वस्तु है।