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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

पक्षपात ही सब अनर्थों का मूल है, यह न भूलना। अर्थात् यदि तुम किसी के प्रति अन्य की अपेक्षा अधिक प्रीति-प्रदर्शन करते हो, तो याद रखो—उसीसे भविष्य में कलह का बीजारोपण होगा।