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कुँवर नारायण के उद्धरण

नेरुदा की अधिकांश कविताओं की प्रकृति रोमांटिक है—कहीं-कहीं तो बिल्कुल छायावादी ढंग की। लेकिन वे सभी अच्छे और श्रेष्ठ साहित्य की तरह उन तत्त्वों को केंद्र में रखती हैं, जिनके बिना हम कला और मनुष्य को सही-सही परिभाषित नहीं कर सकते।