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लीलाधर जगूड़ी के उद्धरण

नए विषयों की उद्‌भावना के लिए, किसी भी रचनाकार को हमेशा खुले मन और खुले दिमाग़ से संसार की हर चीज़ से मिलना चाहिए। सांसारिक यथार्थ और लौकिक परमार्थ के बिना कोई कवि नहीं हो सकता।