नकली-भक्ति-युक्त मनुष्य उपदेश नहीं ले सकता, उपदेष्टा के रूप में उपदेश दे सकता है। इसीलिए कोई उसे उपदेश देता है; तो उसके चेहरे पर कोष के लक्षण, विरक्ति के लक्षण, संग छोड़ने की चेष्टा इत्यादि लक्षण प्रायः स्पष्ट प्रकाश पाते हैं।
अनुवाद :
श्रीरामनंदन प्रसाद