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वात्स्यायन के उद्धरण

नागरक की दिनचर्या इस तरह होनी चाहिए कि प्रातःकाल उठकर नित्यकर्म करने के बाद दाँतों की सफ़ाई करे, देह पर चंदन आदि का लेप लगा; धूप से वासित पुष्पमाला धारण करे, मोम और आलता का प्रयोग करे, दर्पण में अपना मुख देखकर सुगंधित पान खाए, इसके बाद दैनिक कार्यो का अनुष्ठान करे।