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वात्स्यायन के उद्धरण

नागरक के समस्त वैभव-सुख को भोग कर चुका कलाविद् गुणवान विट, सपत्नीक होता है और वेश्याओं एवं नागरकों की गोष्ठी में सम्मानित होता है तथा वेश्याओं और नागरकों के संपर्क से जीविका चलाता है।