स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण
मुझे इस राष्ट्र का हिस्सा होने पर गर्व है, जिसने पृथ्वी के सभी धर्मों और सभी राष्ट्रों के सताए हुए लोगों और शरणार्थियों को शरण दी है।
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