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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

मेरा जीवन ही बहुविध रहा है, किंतु मैंने शाश्वत शब्दों को सदा प्रमाणित पाया है : “सत्यमेव जयते नानृतम्। सत्येन पंथा विततो देवयानः।”