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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

मज़हबी कर्मकांड तथा रस्मो-रिवाज की रक्षा करने के स्थान पर देश तथा राष्ट्र की रक्षा करना, अपनी तथा मनुष्य जाति की उन्नति के लिए कहीं अधिक आवश्यक है।