मैं लड़ाई का पक्षपाती हूँ और टालस्टॉय और महात्मा गाँधी—पूर्ण अहिंसा को जिस अर्थ में धार्मिक सिद्धांत मानते हैं—उस अर्थ में मैं इस पर विश्वास नहीं करता। परंतु मैं सशस्त्र क्रांति करने पर; किसी को शारीरिक हानि पहुँचाने की हिंसा को भी, अपनी वर्त्तमान अवस्था में ठीक नहीं समझता।