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भर्तृहरि के उद्धरण

मौन अर्थात् चुप रहना, यह तो अपने आधीन है तथा और भी इसमें अनेक गुण हैं। विधाता ने इसे अज्ञानता को ढ़कने का उपाय बनाया है, और विशेषकर सर्वज्ञों की सभा में यह मूर्खों का भूषण है।