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भर्तृहरि के उद्धरण

मनुष्य बलपूर्वक मगर के मुख के डाढ़ों की नोक से मणि को निकाल सकता है; और चंचल तरंगों से भरे हुए समुद्र को तैरकर पार हो सकता है, और क्रोधित सर्प को फूल के समान सिर पर धारण कर सकता है, परंतु मूर्ख का चित्त जो असत्य वस्तु में लगा हुआ है, उसे कोई नहीं अलग कर सकता है।