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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

मन की प्रवृत्ति के अनुसार काम मिलने पर अत्यंत मूर्ख व्यक्ति भी उसे कर सकता है, लेकिन सब कामों को जो अपने मन के अनुकूल बना लेता है, वही बुद्धिमान है।कोई भी काम छोटा नहीं है, संसार में सब कुछ वट-बीज की तरह है, सरसों जैसा क्षुद्र दिखाई देने पर भी अति विशाल वट-वृक्ष उसके अंदर विद्यमान है। बुद्धिमान वही है, जो ऐसा देख पाता है और सब कामों को महान् बनाने में समर्थ है।