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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

मन की शक्तियाँ इधर-उधर बिखरी हुई प्रकाश की किरणों के समान हैं। जब उन्हें केंद्रीभूत किया जाता है, तब वे सब कुछ आलोकित कर देती हैं।