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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

महासागर की ओर यदि देखो, तो प्रतीत होगा कि वहाँ पर्वतकाय बड़ी-बड़ी तरंगें हैं, फिर छोटी-छोटी तरंगें भी हैं और छोटे-छोटे बुलबुले भी। पर इन सब के पीछे वही अनंत महासमुद्र है। एक ओर वह छोटा बुलबुला अनंत समुद्र से युक्त है, फिर दूसरी ओर वह बड़ी तरंग भी उसी महासमुद्र से युक्त है। इसी प्रकार, संसार में कोई महापुरुष हो सकता है, और कोई छोटे बुलबुले जैसा सामान्य व्यक्ति; परंतु सभी उसी अनंत महाशक्ति के समुद्र से युक्त है, जो सभी जीवों का जन्मसिद्ध अधिकार है।