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रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण

लक्ष्मण ने राम के लिए सब तरह से आत्मोत्सर्ग किया, वह गौरव गाथा भारतवर्ष के घर-घर में आज भी घोषित हो रही है। लेकिन सीता के लिए उर्मिला का आत्मोत्सर्ग न तो संसार में कोई जानता है, और न काव्य में।

अनुवाद : अमृत राय