Font by Mehr Nastaliq Web

गजानन माधव मुक्तिबोध के उद्धरण

क्रोध-भाव की चेतना के भीतर ही, विशेष मानव-संबंध अपने सामान्य तथा विशिष्ट रूप में देखे जा सकते हैं।