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गजानन माधव मुक्तिबोध के उद्धरण

कल्पना और भावना, दोनों का जो मिला-जुला रूप हमें कलाकृति में दिखाई देता है, उसके माध्यम से हम उन वस्तु-सत्यों का, जीवन-स्थितियों का अनुमान कर सकते हैं कि जिनके प्रति वास्तविक जीवन में की गई संवेदनात्मक प्रतिक्रियाएँ, कवि-हृदय में संचित होकर भाव या भावना का रूप धारण कर चुकी हैं।