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श्यामसुंदर दास के उद्धरण

किसी प्राकृतिक दृश्य को देखक; कलाकार के हृदय में जो भावना जितनी तीव्रता अथवा स्थायित्व के साथ उदय होगी, वह यदि उतनी ही वास्तविकता (सच्चाई) के साथ उसे व्यक्त करने में समर्थ हो, तो उस अभिव्यक्ति के दर्शक, श्रोता अथवा पाठक समाज की भी उतनी ही तृप्ति हो सकती है।