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गजानन माधव मुक्तिबोध के उद्धरण

किसी नई प्रवृत्ति का जो प्रारंभिक चरण होता है; वह आपेक्षिक रूप से तथा पिछली उपलब्धियों की तुलना में, अविकसित और अपुष्ट ही होता है।