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रामधारी सिंह दिनकर के उद्धरण

कविता की पूजा इसलिए नहीं होनी चाहिए कि वह समाज के लिए किसी स्थूल उपयोग की वस्तु है; बल्कि इसलिए कि वह मनुष्य की एक शक्ति है, चीज़ों को देखने की एक दृष्टि है।