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धूमिल के उद्धरण

कविता आदमी को कुछ नहीं देगी, सिवा उस तनाव के जो बातचीत के दौरान दो चेहरों के बीच तन जाता है। इन दिनों एक ख़तरा और बढ़ गया है कि ज़्यादातर लोग कविता को चमत्कार के आगे समझने लगे हैं। इस स्थिति में सहज होना जितना कठिन है, सामान्य होने का ख़तरा उतना बल्कि उस से कहीं ज़्यादा है।