Font by Mehr Nastaliq Web

स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

कर्म का चरित्र पर प्रभाव ही वह सबसे बड़ी शक्ति है, जिससे मनुष्य को निपटना पड़ता है। मनुष्य मानो एक केंद्र है, जो ब्रह्मांड की सभी शक्तियों को अपनी ओर आकर्षित करता है और इस केंद्र में उन सभी को मिलाकर एक विशाल धारा में फिर से प्रवाहित करता है। ऐसा केंद्र ही वास्तविक मनुष्य है—सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ और वही इन शक्तियों को अपनी ओर खींचता है।