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कुँवर नारायण के उद्धरण

कलाएँ और साहित्य; हमारे जीवन को जिस स्तर पर एकता और पूर्णता का आभास कराते हैं, उसे मात्र रोज़मर्रा की ज़रूरतों की भाषा में नहीं व्याख्यायित किया जा सकता।