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कुँवर नारायण के उद्धरण

कबीर यथार्थवादी ही नहीं, एक गंभीर तत्त्वदर्शी सबसे पहले थे। और उनकी कविता इसका सटीक उदाहरण है कि दोनों के बीच समन्वय संभव है।