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कुँवर नारायण के उद्धरण

ऐसी किसी भी व्यवस्था में; समालोचना या समीक्षा का वैज्ञानिक और नैतिक विकास न हो पाना स्वाभाविक है, जहाँ विचार प्रकट करने की पूरी छूट न हो।