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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

जो ईश्वर से प्रेम करना चाहता है, उसे अपनी उत्कट अभिलाषाओं का त्याग करना चाहिए। ईश्वर को छोड़ अन्य किसी बात की कामना नहीं करनी चाहिए।

अनुवाद : पण्डित द्वारकानाथ तिवारी