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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

जब मनुष्य इस संसार में किसी स्त्री से प्रेम करता है; तब कभी-कभी उसे प्रतीत होता है कि उस स्त्री के बिना वह जी नहीं सकता, यद्यपि उसकी यह भावना मिथ्या है।

अनुवाद : पण्डित द्वारकानाथ तिवारी