जब मानव-मन किसी रागमयी कल्पना से उद्वेलित होकर अभिव्यक्त हो उठता है, तब वह अभिव्यक्ति प्रायः गीतरूप में होती है। जब उक्त उद्वेलन चित्त की किसी महान् तथा स्थायी प्रेरणा से उत्पन्न होता है, अथवा बाह्य संसार की कोई उदात्त घटना इसका कारण होती है—तब महाकाव्य का उद्गमन होता है।