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श्याम मनोहर के उद्धरण

जब धर्म, दर्शन, विविध शास्त्र व ललित साहित्य के पुस्तकों को पढ़ने की प्रक्रिया पारिवारिक परिक्षेत्र में आरंभ होगी, तब परिवार में ज्ञान-प्रक्रिया का भी आरंभ होगा। परिवार से ही कवि, लेखक, वैज्ञानिक, कलाकार निर्माण होते हैं।

अनुवाद : निशिकांत ठकार