हम सभी एक ही ईश्वर द्वारा बनाए गए हैं, लेकिन उस एक ईश्वर ने हम सभी को अलग-अलग बनाया है। कोई भी दो लोग कभी एक जैसे नहीं होते, उनके दिल अलग-अलग धड़कते हैं। अगर भगवान सबको एक जैसा बनाना चाहते तो सबको एक जैसा बनाते। इसलिए दूसरों को नीचा देखना, उनका अपमान करना और उन पर अपनी मर्जी थोपना—भगवान का अपमान करना है।