हम में से हर कोई अपनी समझ के हिसाब से कुरान की व्याख्या करता है। व्याख्या करने के चार तरीके हैं। पहला तरीका है : केवल बाहरी अर्थ को समझना, जिससे ज्यादातर लोग संतुष्ट हो जाते हैं। दूसरा तरीका है : आंतरिक अर्थ को समझना जिसे बातें भी कहते हैं। तीसरा तरीका है : आंतरिक आत्मा को समझना। और चौथा तरीका इतना गहरा है कि उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।