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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

हिंदुओं की यह धारणा है कि आत्मा एक ऐसा वृत्त है, जिसकी परिधि कहीं नहीं है; किंतु जिसका केंद्र शरीर में अवस्थित है और मृत्यु का अर्थ है—इस केंद्र का एक शरीर से दूसरे शरीर में स्थानांतरित हो जाना।