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गुरु नानक के उद्धरण

हे प्रभु! तेरी कुदरत विलक्षण है, इसमें आपदा अर्थात् दुःख, जीवों के रोगों का इलाज बन जाता है और सुख उनके लिए दुःख का कारण हो जाता है। परंतु जब असली आत्मिक सुख जीव को मिल जाए, तो दुःख नहीं रहता।