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गुरु नानक के उद्धरण

हे प्रभु! तू एक दरिया के समान है, मैं तुम में रहने वाली एक छोटी-सी मछली हूँ। मैं तेरा अंतिम नहीं ढूँढ़ सकती। मेरी हालत तू ही जानता है, तू ही नित्य देखता है।