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गुरु नानक के उद्धरण

हे प्रभु! मेरे अंदर दूसरों का ज़ुल्म सहने का स्वभाव और धैर्य पैदा कर, यही मेरे लिए दुधारू गाय है, ताकि मेरा मन बहुत शांत अवस्था में रहता हुआ शांति का दूध पी सके।