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दुर्गा भागवत के उद्धरण

द्रौपदी जैसा उत्कट, विराट और प्राकृतिक स्त्रीत्व का अविष्कार अन्यत्र मिलना मुश्किल है।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर