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कुँवर नारायण के उद्धरण

भारतीय चिंतन में शरीर का अंत जीवन का अंत नहीं है, जीवन के पराभौतिक आयाम भी हैं? जीव का चेतन-स्वरूप केवल अपना भौतिक रूप बदलता रहता है।