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कुँवर नारायण के उद्धरण

भारतीय परंपरा का सार और नमनशीलता उसकी निरंतरता में उतनी नहीं, जितनी कि उसकी स्वाभाविकता शांतिप्रियता और विचार मिश्रण की प्रवृत्तियों में निहित है, जो आधुनिकता के चमचमाते पक्षों की अपेक्षा, उसके सर्वाधिक सजीव पक्षों को आत्मसात् करने की ओर अग्रसर रही हैं।